चंद्रवंशी कहार समाज का इतिहास 🥇Chandravanshi Kahar Ka Itihas🥇

आपका स्वागत भारत की सबसे पुरानी चंद्रवंशी पर | आज मैं चंद्रवंशी क्षत्रिय कहर (Chandravanshi Kahar Samaj Ka itihaas) के बारे में ऐसी डिटेल्स बताने जा रहा हूँ जो की आपने पहले नहीं सुना होगा| सबसे पहले यही लिख रही है | मैं हूँ निशांत चंद्रवंशी फाउंडर ऑफ चंद्रवंशी & DigiManako. I am from Patna, Bihar but most of the time I live outside of India.

Chandravanshi Status quote
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Chandravanshi Kahar Ka Itihas-(History) चंद्रवंशी कहार समाज का इतिहास?

(Chandravanshi Kahar) चंद्रवंशी कहार जात भारतवर्ष के प्राचीनतम क्षत्रिय समाजों में से एक है जिसे देश के विभिन्न विभिन्न प्रांतो में विभिन्न विभिन्न नामो से जाना जाता है | कही इसे रवानी तो कही इसे कहार तो कही इसे चंद्रवंशी कहते है परन्तु याद रखने की बात ये है की रवानी और कहार की वंशावली चंद्रवंशी राजा जरासंध से मिलती है| चंद्रवंशी कहार और चंद्रवंशी रवानी बिहार और झारखंड में ये नाम से ज्यादा जाने जाते है |

चंद्रवंशी कहार समाज का इतिहास?
चंद्रवंशी कहार समाज का इतिहास| Chandravanshi Kahar Ka Itihas

राजा जरासंध मगध के महान सम्राट थे और सम्राट जरासंध ने बहुत से क्रूर राजाओं को अपने गुमनाम कारागार में बंदी बनाकर रखा थे परन्तु उन्होंने किसी को भी मारा नहीं था| महाराजा जरासंध अजय अमर बनाना चाहते थे इसलिए उन्हें कैद कर लिए थे|

लगभग 80 राजाओं को को अपने अधीन कर रखे थे |

मगध महाराज जरासंध भगवाणमहादेव का बहुत बड़ा भक्त थे और वो ब्राह्मणों, महिलाओ और बच्चो की बहुत आदर करता थे और साथ में काफी दान पूर्ण करता थे |

साथ में ये भी बताना चाहूंगा महराज जरासंध वचन के भी काफी पक्के थे|

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Chandravanshi Kahar Rajput kaun hai? चंद्रवंशी कहार राजपूत कौन है?

(Chandravanshi Kahar) चंद्रवंशी कहार राजपूत महाराज जरासंध के वंशज होते है | समय बदलता गया नाम बदलते गए | सरकारे बदली गए महत्व बदलते गया | राज्य बदले भवान्यै बदले | बात जानने की जरुरत ये है की चंद्रवंशी कहार और चंद्रवंशी रवानी ही चंद्रवंशी क्षत्रिये है| रवानी या रमानी या कहार चंद्रवंशी क्षत्रिय है। भारत देश के विभिन्न प्रांतों में विभिन्न नामों से पायी जाती है।

Chandravanshi Kahar kaun hai
Chandravanshi Kahar rajput kaun hai

सबसे पहले मैं ये बता दूँ की राजपूत और क्षत्रिय दोनो अलग हैं और ये सामान नहीं है लेकिंग दोनों आपस में सम्बन्ध रखते हैं| राजपूत क्षत्रिय का उपखण्ड हैं| आपने सही सुना क्षत्रिय के अंदर ही राजपूत , रवानी और कहार आते हैं |

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अब मैं पूरी विस्तार से बताने जा रहा हूँ – बिहार प्रदेश में और झारखण्ड प्रदेश में यह चंद्रवंशी क्षत्रिय ,चंद्रवंशी रवानी या चंद्रवंशी रामानी या चंद्रवंशी कहार से जाने जाते है |

उत्तर प्रदेश में ठाकुर राजपूत के नाम से जाने जाते है | राजस्थान प्रदेश में चंद्रवंशी राजपूत के नाम से जाने जाते है |

मध्य प्रदेश में चंद्रवंशी चंदेल राजपूत के नाम से जाने जाते है| कुछ सोमवंशी के नाम से जाने जाते है |

रवानी राजपूत के कुल देवी ज़रा देवी है और कुछ लोग या बोल सकते है कुछ प्रांतो के लोग अपने चंद्रवंशी न लगा कर जरवंशी लगाना शुरू कर दिए है |

मगर हम किसी पर दबाव नहीं दाल सकते की तुम चंद्रवंशी आपने नाम के लगाओ | हर अभिव्यक्ति को स्वतंत्रता हैं ये हिंदुस्तान की संविधान कहता हैं | मुझे आज तक समझ में नहीं आये की लोग कहर(कहार ) शब्द से नफरत क्यों करते हैं| कहर कोई निचा जात नहीं हैं | मैं दावे के साथ कहता हूँ की चंद्रवंशी कहार क्षत्रिय कहार हैं| और इसको मैं थोड़ी देर में बताऊंगा |

(Chandravanshi Kshtriya) चंद्रवंशी क्षत्रिय को चन्द्रवंशी कहार क्यों कहते है ?

इतिहास कहता है कि मगध के शासक महापदमनन्द एक बहुत बड़े अहंकारी , क्रूर व्यक्ति थे| महापदमनन्द को धनानन्द के नाम से भी जाना जाता है | महापदमनन्द के अत्याचार और कहर से भागे (रवाना) हुए चन्द्रवंशी क्षत्रिय रमानी या रवानी या कहार कहलाए। लेकिन ये भी चंद्रवंशी समाज में आते है और ये भी मगध सम्राट “महराज जरासंध” के वंशज हैं |

what is the meaning of chandravanshi kahar caste
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मुझे ये भी पता हैं की आज कल नौजवान नहीं समझेंगे | लेकिन मेरा काम उनको खुश करना नहीं हैं | जो सच है वो सच हैं| और साडी इनफार्मेशन मैं लंदन के बुक म्यूजियम से निकला हैं और कुछ हिंदुस्तान के सरकारी दफ्तरों से |

जिससे मुझे ये पता चला हैं की – “कहार एक जिम्मेदारी हैं” | कहार एक टाइटल है जो शूरवीरो क्षत्रियो को दी जाती थी |
“कहर” शब्द को खंडित कर कहार शब्द बना है। कहर एक जिम्मेदारी|

कहार को संस्कृत में ‘स्कंधहार ‘ कहते हैं जिसका तात्पर्य होता है,जो अपने कंधे पर भार ढोता है, जिम्मेदारी लेता हो |कहर एक जिम्मेदारी|

मैंने ये भी पता किया की क्यों दी जाती थी और इसको समझने के लिए मुझे इतिहास के और भी अंदर जाना होगा|

उस समय डाकूओ का प्रचलन जोरो पर था| डाकू न तो दिन देखते थे और न ही रात| न उनको किसी का भय था | वो कब किसको लूट ले या बल्तकार कर दे कोई नहीं जनता था|
आज भी हमलोग समाज में देख सकते है की नाम बदलकर डाकू के जगह फ्रोड, जालसाज, घोटाले,छिनतई ने ले रखी है और समाज को लूट रहे हैं |

खैर उस समय डाकुओ द्वरा दुल्हन की डोली के साथ जेवरात लूटना एक आम बात थी मनो जैसे आप बगीचे में गए और एक आम तोड़ लिया | दोनों बाते में थोड़ा स भी फर्क नहीं हैं |
महाभारत काल मे लोग भयभीत थे| अइसे समय को देख कर राजाओ ने ये काम शूरव वीर क्षत्रिय को दिया और एक टीम गठन हुए जिसको कहार कहा गया|
ये टीम डोली लुटेरों से रक्षा हेतुं, दुल्हन की डोली के साथ कहर टीम जाती थी और उनकी रक्षा करते हुवे मंजिल तक पहुँचते थे|

आज कल के नौजवान बिलकुल नहीं समझेंगे और न समझना चाहएंगे मगर अगर आप सब ध्यान दे तो शादी की कार्ड पर डोली के आगे और पीछे तलवार लिए कुछ लोग की चित्रांकन देखने को मिलेगा| ये क्षत्रिय कहार है और लोगो को ऐसी कार्ड से बताते थे की डोली सुरक्षित हैं और आप शादी विवाह में सरिक हो |

जैसे जैसे समय बीतता गया और शब्दों में परिवर्तन होता गया,कहर से कहार बन गया| रोजगार, गरीबी और आर्थिक जरुरतो के पूर्ण के लिए कुछ क्षत्रिय लोग डोली उठाने का काम को जारी रखे |

Genealogical of chandravanshi kahar

क्षत्रिय और राजपूत समान नहीं हैं लेकिंग देखा जाये इतिहास तो ये दोनों लगभग एक हैं| मेरा मतलब दोनों संबंध रखते हैं| राजपूत क्षत्रिय का हिस्सा या उपखंड आप बोल सकते हो। चंद्रवंशी, यादव, रवानी, कहर या राजपूत ये सब क्षत्रिय का उपखंड हैं|

इतिहास के पन्नो पर अगर एक नजर डाले तो हमे ये पता चलता हैं की क्षत्रिय प्राचीन भारत के राजा हुआ करते थे| यह मुख्य रूप से 200 ईसा पूर्व (200 BC)तक वैदिक काल में अपने चरम पर था।

अब बात करते हैं राजपूत जो की क्षत्रिय का उपखंड हैं| राजपूत विविध जनजातियों और खानाबदोश समूहों का एक बहुत बड़ा संग्रह है जो 700 ईस्वी के आसपास गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद सत्ता में आए थे।

धयान दे की क्षत्रिय इनसे बहुत पहले से थे| मुगलों के आने तक राजपूत 700 AD से सत्ता में थे और उसके बाद धीरे धीरे दबदबा काम होने लगा । दबदबा काम हुआ मगर दूसरे हिन्दू जाती से बहुत ज्यादा था और अंग्रेजी हुकुमत में और भी ये विकसित हुए |

इसलिए आज राजपूत जातिअधिकतम राज्यों में जनरल केटेगरी में आते हैं और वे एक आर्थिक रूप से मजबूत जाति हैं, जिसने अंततः उन्हें जाति बना दिया गया हिंदुस्तान में।

ठीक ऐसी तरह कुछ क्षत्रिये को कहर (कहार, कहर) जाति बना दिया गया| क्षत्रिय कहार कैसे बने वो मैं आगे बताऊंगा | उसके पहले अवि कुछ चिझे और बताना चाहूंगा|

कुछ मूल क्षत्रिय जातियों ने लगभग 2200 साल पहले सत्ता खो दी थी जो की अब वो कहलाते हैं यादव, शाक्य, कहार इत्यादि और इसी के बाद जिसके बाद नंद वंश सत्ता में आया।

कोई शक्ति नहीं होने के कारण, शाक्य और कहार जाति ने अपनी अधिकांश वित्तीय और राजनीतिक ताकत खो दी, जिसने उन्हें पिछड़ी जाति बना दिया गया ।

यही उनकी ओबीसी स्थिति का मुख्या कारण है। क्षत्रिय कहार जाति के साथ भी यही कारण है।

कहार एक पेशे का नाम था जो क्षत्रिय द्वारा निभाया जाता था | जी हाँ आप ने सही सुना निभाया जाता था न की किया जाता था | कहार एक जिम्मेदारी थी |

डोली, आभूषण, बारात और दुल्हन की रक्षा करने के लिए कुछ क्षत्रिय को ये काम सौंपा गया“| शाक्य जाति सूर्यवंश का एक क्षत्रिय वंश है और कहार चंद्रवंश का एक क्षत्रिय वंश है। दोनों यूपी, बिहार और एमपी में ओबीसी (OBC List) सूची में हैं। लेकिन बाकी भारतीय राज्यों में सामान्य श्रेणी (General category)में हैं।

और मैं ये भी परिभाषा बताना चाहूंगा की पिछड़े (OBC, SC, ST) का मतलब निम्न नहीं है और सामान्य (General) का अर्थ उच्चतर नहीं है। यह गलतफहमी है हमारे समाज के संपादकों में जो इसको गलत तरीके से समझते है और अखबारों में गलत छापते हैं|

सबसे से पहले 1993 में भारत सरकार द्वारा आरक्षण श्रेणियों की शुरुआत की गई थी। ओबीसी (OBC Category ) सूची में एक समुदाय को जोड़ने से पहले सिर्फ सामाजिक कारकों के अलावा सरकार कई कारकों को भी देखती है और इसका मतलब ये नहीं है की वो नीच जाति से हैं या ऊंची जाति से हैं |

Chandravanshi kahar caste obc

आपको मैं उदाहरण से समझता हूँ जी की गोवेरमनेट वेबसाइट से ली गए हैं परमिशन लेने के बाद –

एक समुदाय में कितना साक्षरता का प्रतिशत हैं और समुदाय की शहरी और ग्रामीण आबादी का प्रतिशत कितने प्रतिशत हैं |

  • प्रति व्यक्ति आय
  • आय आय (कृषि, व्यापार, सेवाएं आदि)
  • राजनीति और सरकारी नौकरियों में भागीदारी आदि

ओबीसी श्रेणी (OBC List ) की सूची जो की रा दूसरे राज्य में भिन्न होती है। अलग होती हैं | और राज्य और केंद्र के बीच भी अंतर करता है।

एक जाति जो एक राज्य में सामान्य है तो ये जरुरी नहीं की हिंदुस्तान के दूसरे राज्यों में बिलकुल वही वही हो | वह दूसरे राज्य में ओबीसी में हो सकती है या ST\SC category भी हो सकता हैं । कई राज्यों में एक जाति ओबीसी (OBC List ) केंद्रीय में सामान्य हो सकती है।

इसलिए ओबीसी श्रेणी (OBC List ) किसी भी समुदाय के सामाजिक प्रतिष्ठा को आंकने का मापदंड नहीं है और नहीं कोई परिभाषा देती है नीच और ुचि जाति का |

भारत सरकार द्वारा तय की गई आरक्षण श्रेणियां इस बात पर आधारित नहीं हैं कि कौन सी जाति उच्च या निम्न है बल्कि ये बताया हैं की कौन सी समुदाय किस स्थान पर है ।

OBC sc st versus general caste details
OBC sc st versus general caste details

सरकार ने मुख्य रूप से एक जाति की प्रति प्रधान वित्तीय आय पर आधारित किया है।

कुछ उदाहरण मैं आपको दे रहा हूँ और ये परमिशन ले कर लिखा जा रहा हैं ,

  •  त्यागी ब्राह्मण जो हरियाणा में ओबीसी में हैं।
  • गिरी / गोस्वामी ब्राह्मण जो बिहार में ओबीसी में हैं।
  • कर्नाटक में राजपूत ओबीसी में हैं और बाकि राज्यों में (general category) में आता हैं ।
  • मराठा महाराष्ट्र में सामान्य श्रेणी (general category) में हैं, जबकि कर्नाटक में मराठा ओबीसी (OBC category) में हैं। शिवाजी एक मराठा थे।
  • पटेल / पाटीदार भी फॉरवर्ड जाति में आती है। हम सभी ने गुजरात में पटेल आंदोलन की खबरें सुनी हैं टीवी या समाचार पत्र में । लेकिन यूपी, एमपी और कई राज्यों के पटेल / पाटीदार केंद्र की ओबीसी सूची (OBC category) में हैं, जबकि गुजरात में पटेल / पाटीदार राज्य और केंद्र दोनों में सामान्य श्रेणी (general category) में हैं।
  • जाट केंद्र में एक सामान्य (general category)जाति है, लेकिन जाट दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में ओबीसी (OBC category) में हैं।
  • इसके अलावा, भले ही राजस्थान के जाट ओबीसी (OBC category) में हैं, फिर भी राजस्थान के भरतपुर और धौलपुर जाट सामान्य श्रेणी (general category) में हैं।
  • भले ही यादव यूपी और कई राज्यों और केंद्र में ओबीसी (OBC category) में हैं। लेकिन यादव चंद्रवंशी क्षत्रिय हैं और भगवान कृष्ण यादव थे। यादव चन्द्रवंश के उपखण्ड है और चंद्रवंशी उपखण्ड है क्षत्रिय का|

ओबीसी (पिछड़ी जाति) सामाजिक स्थिति का संकेतक नहीं है।

यादव चंद्रवंशी क्षत्रिय हैं। भगवान कृष्ण यादव थे। फिर भी यादव ओबीसी श्रेणी (OBC category) में हैं। जबकि जाट शूद्र हैं, लेकिन फिर भी वे जनरल श्रेणी (general category) में हैं।

chandravanshi yadav is also in obc category
chandravanshi yadav is also in obc category

जातिवाद ek बीमारी है जो कभी नहीं जाती| और अगर अआप इसकी परिभाषा मुझसे पूछते है तो मैं यही बतायूंगा की जातिवाद दो प्रजातियों में मतभेद के होने की वज़ह से होने वाला विवाद को ही हम जातिवाद कहते है। और ये कोई नए चीझ नहीं हैं| देखा जाये तो ये भारत में इसका आरम्भ लगभग ६ठीं शताब्दी से प्रारंभ हो चूका था |

Chandravanshi kahar caste in bihar

रवानी राजपूत या कहार क्षत्रिये पूरे बिहार में एक प्रसिद्ध जातियों के रूप में उभर रहे हैं और इनके संख्या बाकि जातियों से नंबर में ज्यादा है | बिहार के नवीनगर क्षेत्र , राजगीर और गिरिडीह को रवानी का या कहार का गढ़ कहा जाता है और भारत के कुछ हिस्सों में इन्हें चंद्र पुत्र भी कहा जाता है।

 

चंद्रवंशी क्षत्रियो पर भारत की स्वतंत्रता का असर

चंद्रवंशी समाज ज्यादातर राज्यों और प्रदेशो में जनरल केटेगरी में आती है परन्तु कुछ राज्य जैसे बिहार और झारखण्ड में चंद्रवंशी OBC केटेगरी में आते है.

बात है सन् 1947  का जब देश आज़ाद हुआ और पुरे देश में आज़ादी का जश्न का माहौल था | समाज जश्न मानाने रहे थे और इधर सरकर बन रही थी.

यहाँ तक तो सब कुछ सही चल रहा था मगर जब सरकार बनी तो कुछ बदलाव भी हुआ|

चंद्रवंशी क्षत्रिये , चंद्रवंशी कहार और चंद्रवंशी रवानी ये सब १९४७ के पहले जमींदार हुआ करते थे|

क्षत्रियए का कोई भी स्वरुप या उपखंड जमींदार ही हुआ करते थे चाहे वो कहर हो रवानी हो या राजपूत|

परन्तु बदलाव ये आया की सरकार चन्द्रवंशियो का ज़मीन अपने कब्जे में लेना स्टार्ट कर दिया |

धीरे धीरे सरकार सभी चन्द्रवंशियो का खास कर बिहार, झरखण्ड के चन्द्रवंशियो का सभी जमीने अपने कब्जे में कर लिया |

बस यही कारन था चंद्रवंशी का आर्थिक स्तिथि ख़राब होना | जमीन न होने के कारन वो खेती नहीं कर पाए और उस समय कोई टेक्नोलॉजी शिक्षा थी जिनसे उनको नौकरी मिल सके|

जैसा का आप जानते है चन्द्रवंशियो की संख्या अन्य समाज से कही ज्यादा है जिसके कारन चंद्रवंशी समाज का स्तिथी ख़राब होने लगा|

कुछ समाजिक दल बैंक वोटिंग के लिए चंद्रवंशी समाज के लिए सरकार से बात की |

कुछ सालो तक बातचीत हुआ फिर निर्नय लिया गया की चंद्रवंशी समाज जो बिहार और झारखण्ड में बसे है उनको विशेष दर्जा दिया जाये|

स्तिथि देख कर उस समाज के लोगो को स्वीकार करना पडा और सरकार ने (Chandravanshi Kahar) चंद्रवंशी कहार और चंद्रवंशी रवानी को OBC Category में रखा गया |

चंद्रवंशी को सरकारी नौकरी में आरक्षण मिलना शुरू कर दिया और साथ में सरकारी स्कूल और कॉलेजेस में एडमिशन के लिए भी आरक्षण मिलना शुरू हो गया|

लेकिंग अब जनता जागरूक हो गया अब अधिकतम चंद्रवंशी आरक्षण का लाभ लेना छोर दिया और अब अपने हक़ के लिए चंद्रवंशी कहार, चंद्रवंशी रवानी और चंद्रवंशी क्षत्रियो को जनरल केटेगरी में डालने के लिए सरकार से े गुजारिश कर रहे है|

जगह जगह लोग मीटिंग कर रहे है और अपनी खोई होइ महत्व और पहचान वापस लेना चाहते है| नए समाज और सरकार ने चंद्रवंशी कहार को उतना महत्व नहीं देता जितना देना चाहिए|

Chandravanshi Kahar Ka Itihas – History

चंद्रवंशी कहार , चंद्रवंशी रवानी और चंद्रवंशी क्षत्रिये ये सब लोग एक ही समाज के लोग है और उस समाज का नाम चंद्रवंशी समाज है| कुछ दूसरे जात, समाज और सरकार ने चन्द्रवंशियो को टुकडो में बात दिए है जिससे ये लोग एक ना हो सके|

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हमारी एकता को तोडा गया है| कोई हमें चंद्रवंशी क्षत्रिय में बाट दिया तो कोई चंद्रवंशी कहार में तो कोई हमे चंद्रवंशी क्षत्रिये में| जिसकी वजह से हमलोग एक जुत नहीं हो पते और हमलोग एक प्यारा सा चंद्रवंशी समाज नहीं बना पाते|

Genealogical of Lunar Dynasty kahar caste
Genealogical of Lunar Dynasty caste

अब समय आ गया है एक होने का | सभी चंद्रवंशी कहार, चंद्रवंशी रवानी और चंद्रवंशी क्षत्रिये को एक होना होगा| एक नया समाज चंद्रवंशी बनाना होगा जिसमे हर लोग को बराबर मन जायेगा| हम एक थे और एक रहेंगे |

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ए पॉजिटिव, ए निगेटिव के फेरा में न रहे।

चन्द्रवंशियों का खून हर उस रगों में दौड़ रहा है जो गरीब है,मजदूर,अमीर है,इंजीनियर है,डॉक्टर है ।

किसी की जीहुजूरी करके जी रहा है पेट पाल रहा है। हमे एहसास कराना होगा समाज के सभी नीचे से ऊपर तक के पायदान पर खड़े गरीब से अमीर लोगो के बीच की हमारे खून में चन्द्रवंशियों का खून दौड़ रहा है।

मगध साम्राज्य के सपनो को साकार करने के लिए कुछ दीवारों को ध्वस्त कर मगध सम्राट के गौरवशाली इतिहास से अपने वर्तमान को अवगत कराना होगा।

उसके लिए अभियान चलाने की ज़रूरत है। चन्द्रवंशी जागेगा जब उसे अपने पूर्वजों के शौर्य और पराक्रम की अनुभूति होगी।

इसके लिए हमसबो की जवाबदेही और ज्यादा बढ़ गयी है। जरासंध जयंती और विराट शोभायात्रा ने सोए हुए समाज को झकझोरा है।

मन्ज़िले अभी और आगे है।हमे न रुकना है न थकना है।चन्द्रवंशियों के सैलाब और जरासंध की सेना को बढ़ते रहना है।संघर्ष जारी रखें।इतिहास को दुहरायेंगे, मगध में परचम लहरायेंगे।

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मुझे उम्मीद है कि इस गाइड ने आपको दिखाया कि चंद्रवंशी कहार का इतिहास (इतिहास) क्या है। History of Chandravanshi kahar kshtriya.

और अब मैं आपसे पूछना चाहता हूं।

क्या आपने चंद्रवंशी कहार (Chandravanshi Kahaar) कुछ नया सीखा ?

या हो सकता है कि आपका कोई सवाल हो।

किसी भी तरह से, अभी नीचे एक टिप्पणी छोड़ दें।

मैं इस ब्लॉग में आपके उत्तर का उल्लेख करूंगा।

जय जरासंध 🙂

💪 सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं चंद्रवंशी समाज नहीं मिटने दूंगा, मैं चंद्रवंशी सर नहीं झुकने दूंगा! 💪
– निशांत चंद्रवंशी

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2 thoughts on “चंद्रवंशी कहार समाज का इतिहास 🥇Chandravanshi Kahar Ka Itihas🥇”

  1. Nice bro ….. Apne he log Galat galat information YouTube pe dal rahe hai … or hum bhaiyo ko ek Dushre se alag kr rahe …

    Ye Itihass yaad rakhega aapne Jo samaj ko aage badhne ke Lea keya hai !!

    Reply
    • Thank you Sameer singh for such lovely words. All are equal for me & I am doing my best to share correct information about chandravanshi samaj. I have also shared the history of Jarasandha King, Rawani Rajput and Ramchandra chandravanshi. Please read all those information. You can check my youtube channel chandravanshi Inc and You can also join Facebook group – United Chandravanshi association.

      इतने प्यारे शब्दों के लिए समीर सिंह को धन्यवाद। मेरे लिए सभी समान हैं और मैं चंद्रवंशी समाज के बारे में सही जानकारी साझा करने की पूरी कोशिश कर रहा हूं। मैंने जरासंध राजा, रावणी राजपूत और रामचंद्र चंद्रवंशी के इतिहास को भी साझा किया है। कृपया उन सभी जानकारी को पढ़ें। आप मेरे youtube चैनल chandravanshi Inc को चेक कर सकते हैं और आप फेसबुक ग्रुप – यूनाइटेड चंद्रवंशी एसोसिएशन से भी जुड़ सकते हैं।

      Reply

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