चंद्रवंशी कहार का इतिहास 🥇Chandravanshi Kahar🥇

(Chandravanshi Kahar) चंद्रवंशी कहार जाति क्या है ?

(Chandravanshi Kahar) चंद्रवंशी कहार जात भारतवर्ष के प्राचीनतम क्षत्रिय समाजों में से एक है जिसे देश के विभिन्न विभिन्न प्रांतो में विभिन्न विभिन्न नामो से जाना जाता है | कही इसे रवानी तो कही इसे कहार तो कही इसे चंद्रवंशी कहते है परन्तु याद रखने की बात ये है की रवानी और कहार की वंशावली चंद्रवंशी राजा जरासंध से मिलती है| चंद्रवंशी कहार और चंद्रवंशी रवानी बिहार और झारखंड में ये नाम से ज्यादा जाने जाते है |

राजा जरासंध मगध के महान सम्राट थे और सम्राट जरासंध ने बहुत से क्रूर राजाओं को अपने गुमनाम कारागार में बंदी बनाकर रखा थे परन्तु उन्होंने किसी को भी मारा नहीं था|

लगभग 80 राजाओं को को अपने अधीन कर रखे थे |

मगध महाराज जरासंध भगवाणमहादेव का बहुत बड़ा भक्त थे और वो ब्राह्मणों, महिलाओ और बच्चो की बहुत आदर करता थे और साथ में काफी दान पूर्ण करता थे |

साथ में ये भी बताना चाहूंगा महराज जरासंध वचन के भी काफी पक्के थे|

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(Chandravanshi Kahar) चंद्रवंशी काहर राजपूत कौन है ?

(Chandravanshi Kahar) चंद्रवंशी कहार महाराज जरासंध के वंशज होते है | समय बदलता गया नाम बदलते गए | सरकारे बदली गए महत्व बदलते गया | राज्य बदले भवान्यै बदले |

बात जानने की जरुरत ये है की चंद्रवंशी कहार और चंद्रवंशी रवानी ही चंद्रवंशी क्षत्रिये है| रवानी या रमानी या कहार चंद्रवंशी क्षत्रिय है। भारत देश के विभिन्न प्रांतों में विभिन्न नामों से पायी जाती है।

बिहार प्रदेश में और झारखण्ड प्रदेश में यह चंद्रवंशी क्षत्रिय ,चंद्रवंशी रवानी या चंद्रवंशी रामानी या चंद्रवंशी कहार से जाने जाते है |

उत्तर प्रदेश में ठाकुर राजपूत के नाम से जाने जाते है | राजस्थान प्रदेश में चंद्रवंशी राजपूत के नाम से जाने जाते है |

मध्य प्रदेश में चंद्रवंशी चंदेल राजपूत के नाम से जाने जाते है| कुछ सोमवंशी के नाम से जाने जाते है |

रवानी राजपूत के कुल देवी ज़रा देवी है और कुछ लोग या बोल सकते है कुछ प्रांतो के लोग अपने चंद्रवंशी न लगा कर जरवंशी लगाना शुरू कर दिए है |

चंद्रवंशी क्षत्रिय को चन्द्रवंशी कहार क्यों कहते है ?

इतिहास कहता है कि मगध के शासक महापदमनन्द एक बहुत बड़े अहंकारी , क्रूर व्यक्ति थे| महापदमनन्द को धनानन्द के नाम से भी जाना जाता है |

महापदमनन्द के अत्याचार और कहर से भागे (रवाना) हुए चन्द्रवंशी क्षत्रिय रमानी या रवानी या कहार कहलाए।

लेकिन ये भी चंद्रवंशी समाज में आते है और ये भी मगध सम्राट “महराज जरासंध” के वंशज हैं |

रवानी राजपूत या कहार क्षत्रिये पूरे बिहार में एक प्रसिद्ध जातियों के रूप में उभर रहे हैं और इनके संख्या बाकि जातियों से नंबर में ज्यादा है |

बिहार के नवीनगर क्षेत्र , राजगीर और गिरिडीह को रवानी का या कहार का गढ़ कहा जाता है और भारत के कुछ हिस्सों में इन्हें चंद्र पुत्र भी कहा जाता है।

चंद्रवंशी क्षत्रियो पर भारत की स्वतंत्रता का असर

चंद्रवंशी समाज ज्यादातर राज्यों और प्रदेशो में जनरल केटेगरी में आती है परन्तु कुछ राज्य जैसे बिहार और झारखण्ड में चंद्रवंशी OBC केटेगरी में आते है.

बात है सन् 1947  का जब देश आज़ाद हुआ और पुरे देश में आज़ादी का जश्न का माहौल था | समाज जश्न मानाने रहे थे और इधर सरकर बन रही थी.

यहाँ तक तो सब कुछ सही चल रहा था मगर जब सरकार बनी तो कुछ बदलाव भी हुआ|

चंद्रवंशी क्षत्रिये , चंद्रवंशी कहार और चंद्रवंशी रवानी ये सब १९४७ के पहले जमींदार हुआ करते थे|

क्षत्रियए का कोई भी स्वरुप या उपखंड जमींदार ही हुआ करते थे चाहे वो कहर हो रवानी हो या राजपूत|

परन्तु बदलाव ये आया की सरकार चन्द्रवंशियो का ज़मीन अपने कब्जे में लेना स्टार्ट कर दिया |

धीरे धीरे सरकार सभी चन्द्रवंशियो का खास कर बिहार, झरखण्ड के चन्द्रवंशियो का सभी जमीने अपने कब्जे में कर लिया |

बस यही कारन था चंद्रवंशी का आर्थिक स्तिथि ख़राब होना | जमीन न होने के कारन वो खेती नहीं कर पाए और उस समय कोई टेक्नोलॉजी शिक्षा थी जिनसे उनको नौकरी मिल सके|

जैसा का आप जानते है चन्द्रवंशियो की संख्या अन्य समाज से कही ज्यादा है जिसके कारन चंद्रवंशी समाज का स्तिथी ख़राब होने लगा|

कुछ समाजिक दल बैंक वोटिंग के लिए चंद्रवंशी समाज के लिए सरकार से बात की |

कुछ सालो तक बातचीत हुआ फिर निर्नय लिया गया की चंद्रवंशी समाज जो बिहार और झारखण्ड में बसे है उनको विशेष दर्जा दिया जाये|

स्तिथि देख कर उस समाज के लोगो को स्वीकार करना पडा और सरकार ने (Chandravanshi Kahar) चंद्रवंशी कहार और चंद्रवंशी रवानी को OBC Category में रखा गया |

चंद्रवंशी को सरकारी नौकरी में आरक्षण मिलना शुरू कर दिया और साथ में सरकारी स्कूल और कॉलेजेस में एडमिशन के लिए भी आरक्षण मिलना शुरू हो गया|

लेकिंग अब जनता जागरूक हो गया अब अधिकतम चंद्रवंशी आरक्षण का लाभ लेना छोर दिया और अब अपने हक़ के लिए चंद्रवंशी कहार, चंद्रवंशी रवानी और चंद्रवंशी क्षत्रियो को जनरल केटेगरी में डालने के लिए सरकार से े गुजारिश कर रहे है|

जगह जगह लोग मीटिंग कर रहे है और अपनी खोई होइ महत्व और पहचान वापस लेना चाहते है| नए समाज और सरकार ने चंद्रवंशी कहार को उतना महत्व नहीं देता जितना देना चाहिए|

चंद्रवंशी कहार , चंद्रवंशी रवानी और चंद्रवंशी क्षत्रिये ये सब लोग एक ही समाज के लोग है और उस समाज का नाम चंद्रवंशी समाज है| कुछ दूसरे जात, समाज और सरकार ने चन्द्रवंशियो को टुकडो में बात दिए है जिससे ये लोग एक ना हो सके|

हमारी एकता को तोडा गया है| कोई हमें चंद्रवंशी क्षत्रिय में बाट दिया तो कोई चंद्रवंशी कहार में तो कोई हमे चंद्रवंशी क्षत्रिये में| जिसकी वजह से हमलोग एक जुत नहीं हो पते और हमलोग एक प्यारा सा चंद्रवंशी समाज नहीं बना पाते|

अब समय आ गया है एक होने का | सभी चंद्रवंशी कहार, चंद्रवंशी रवानी और चंद्रवंशी क्षत्रिये को एक होना होगा| एक नया समाज चंद्रवंशी बनाना होगा जिसमे हर लोग को बराबर मन जायेगा| हम एक थे और एक रहेंगे |

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मुझे उम्मीद है कि इस गाइड ने आपको दिखाया कि चंद्रवंशी कहार का इतिहास (इतिहास) क्या है।

और अब मैं आपसे पूछना चाहता हूं।

क्या आपने चंद्रवंशी कहार (Chandravanshi Kahaar) कुछ नया सीखा ?

या हो सकता है कि आपका कोई सवाल हो।

किसी भी तरह से, अभी नीचे एक टिप्पणी छोड़ दें।

मैं इस ब्लॉग में आपके उत्तर का उल्लेख करूंगा।

जय जरासंध 🙂

💪 सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं चंद्रवंशी समाज नहीं मिटने दूंगा, मैं चंद्रवंशी सर नहीं झुकने दूंगा! 💪
– निशांत चंद्रवंशी

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चंद्रवंशी कहार का इतिहास [ Chandravanshi Kahar ]
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चंद्रवंशी कहार का इतिहास [ Chandravanshi Kahar ]
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चंद्रवंशी कहार का इतिहास - Chandravanshi Kahar also knownas Chandravanshi Rawani or Chandravanshi kshatriya
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United Chandravanshi Association UCA | संयुक्त चंद्रवंशी महासंघ
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