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🥇Kulbhushan Nathuni Babu Singh ka Itihas | नथुनी बाबू

Kulbhushan Nathuni Babu Singh ka Itihas

मैं निशांत चंद्रवंशी आज आपको कुलभूषण नथुनी बाबू सिंह का इतिहास बताने जा रहा हूँ। मैं राष्ट्रीय सामाजिक मुद्दों पर वीडियो बनाता हूं और आप इस लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं।

https://www.youtube.com/channel/UCF3XAA7OkxeIFMFX3GS7hyg

अखिल भारतीय चंद्रवंशी क्षत्रिय महासभा के निर्माता कुलभूषन बाबू नथुनी सिंह जी थे। पुरुकुल के अमर सुरवीर योद्धा क्षत्रिय कुलभूषन बाबू नथुनी सिंह जी का जन्म रविवार 13 सितम्बर 1856 ई० को हुआ था और हर चन्द्रवंश के लिए महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण दिन हैं।

भारत के निर्माण में सभी भारतीय का हाथ रहा है लेकिन सृष्टि के निर्माण एवं कर्म क्षेत्र के आधार पर की गयी वर्ण व्यवस्था के बाद भारत को गौरवपूर्ण करने में क्षत्रिय समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रहीं है ।

क्षत्रिय समाज में दो वंशो के क्षत्रियों ने अपने त्याग, बलिदान, एवं कूर्बानी से भारत को सर्वश्रेष्ठ बनाने का काम किया है जो किसी से छिपा नहीं है। आज आप दुनिया के किसी भी इतिहासिक किताब को उठा कर देखिये। आपको इसका वर्णन मिल जायेगा।

भारत का नामकरण भी चन्द्रवंशी क्षत्रिय राजा भरत के नाम पर ही हुआ है और राजा भरत को जानने के लिए आपको महाभारत पढ़ना या देखना पड़ेगा अगर आप नहीं जानते हो तो ।

इस वंश में ऐसी विभूतियों का जन्म हुआ जिन्होंने अपने पराक्रम से पूरी दुनिया का इतिहास की दिशा ही बदल दी। भारत के ग्रथों में अपना इतिहास अपने हाथों से लिखने एवं पाने का काम किया है ।

चन्द्रवंश समाज के ही पराक्रमी, न्याय, दानी एवं त्यागी राजा नहुष ने भगवान ‘इन्द्र’ की भी गद्दी को भी सम्भालने का काम किया था । राजा नहुष के विवाह माता पार्वती एवम् महादेव शंकर के पुत्री अशोक सुंदरी से हुआ था जो की आपको भारतीय ग्रन्थ में मिल जायेगा।

द्वापर युग में अहंकार से समाज और परिवार को बचने के लिए अपने ही परिवार के महान् एवं पराक्रमी योद्धाओं से ”कुरूक्षेत्र” के मैंदान में एक ‘महान धर्मयुद्ध’ लड़ने का काम किया जो “महाभारत” के नाम से पूरी दुनिया में जाना जाता हैं।

इस महान युद्ध में भगवान विष्णु को ‘कृष्ण’ के रूप में चंद्रवंशी क्षत्रिय वंश में ही अवतार लेकर अपनी भूमिका का निर्वाह करना पड़ा था। भगवान् कृष्णा चंद्रवंशी के पुत्र थे मगर उनके बाद जो वंश आये वो यदुवंशी कहलाये।

यानी की चंद्रवंशी समाज से ही यदुवंशी का स्थापना हुआ।

महान ग्रंथो, वेदों एवं पुराणों का अध्ययन अगर हम करें तो “चंद्रवंशी क्षत्रिय” वंश की महत्ता आसानी से समझी जा सकती हैं लेकिन संसार में परिवर्तन हमेशा होता रहता है।

उसी समय काल क्रम में चंद्रवंशी क्षत्रिय वंश के उत्थान की गति रुकी और पतन की गति प्रारम्भ शुरू हो गई । महाराजा जरासंध जो एक विशाल मगध साम्राज्य के राजा थे और चन्द्रवंश क्षत्रिय वंश के अंतिम चक्रवर्ती सम्राट हुये।

इनके बाद सत्ता परिवर्तन हुआ और समाज पतन की ओर बढ़ता गया। लेकिन समय काल क्रम ने पलट खाया और इस वंश में ऐसी महान विभूतियों का जन्म हुआ जिन्होंने भारत की गुलामी के समय में सन् 1868 में एक जगह बैठकर देश की गुलामी से मुक्त होने का मोर्चा भी निकला था. उनका नाम कुलभूषन नथुनी बाबू सिंह था।

एक तरफ देश की आजादी की लड़ाई अंग्रेज़ो से लाडे एवं दूसरी तरफ सामाजिक क्षेत्रों में एकता बनाकर चंद्रवंशी क्षत्रिय परिवार को पूर्व के गौरव सम्मान एवं प्रतिष्ठा दिलाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम उठाना।

कुलभूषण नथुनी बाबू सिंह का इतिहास

इसी क्रम में स्व० नथुनी प्रसाद सिंह जी का प्रादुर्भाव हुआ। 13 सितम्बर 1856 ई० में पटना सिटी के मारुफगंज में जन्में बाबू नथुनी जी का लालन पालन बहुत ही सुखी माहौल में हुआ। इनके पिता बाबू श्यामलाल सिंह जी उस ज़माने के जाने माने एजेंट एवं आर्डर सप्लायर थे। बालक नथुनी जी ज्यों ज्यों बड़े हुए सादगी और व्यव्हार से ओत प्रोत होते गए और आगे चलकर उन्होंने चन्द्रवंशी समाज के अलावे शोषितों, दलितों के उत्थान के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किये।

जब कुलभूषन बाबू नथुनी सिंह जी 50 -51 साल के थे तब वो समाज सेवा के इसी दौर में अपने छिपे लोगों की खोज की प्रक्रिया में सन् 1906 में एक राष्ट्रिय मंच की स्थापना की, जिसका नाम “ऑल इण्डिया चंद्रवंशी क्षत्रिय महासभा” रखा।

इसके कार्यकारिणी में बंगाल से लेकर लाहौर तक लोगों का प्रतिनिधित्व किया गया।

सन् 1912 ई० में भारत के जनगणना विभाग के प्रधान से मिलकर उन्होंने चंद्रवंशियों के इतिहास की जानकारी दी और भारत कंपनी एक्ट 1882 के तहत महासभा का रजिस्ट्रेशन “अखिल भारतवर्षीय चन्द्रवंशी क्षत्रिय महासभा” नाम से करवाया।

  • कुलभूषन नथुनी बाबू सिंह का जन्म – 13 सितम्बर 1856 ई०
  • कुलभूषन नथुनी बाबू सिंह का पिता – बाबू श्यामलाल सिंह
  • अखिल भारतवर्षीय चंद्रवंशी क्षत्रिय महाशभा का स्थापना दिवस – 1906
  • अखिल भारतवर्षीय चंद्रवंशी क्षत्रिय महाशभा का स्थापक – कुलभूषन नथुनी बाबू सिंह
  • कुलभूषन नथुनी बाबू सिंह का जन्म का जन्मभूमि – पटना सिटी के मारुफगंज

अखिल भारतीय चंद्रवंशी क्षत्रिय महासभा

अखिल भारतीय चंद्रवंशी क्षत्रिय महासभा के स्थापना के बाद चन्द्रवंशी क्षत्रिय परिवार के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, धार्मिक, सांस्कृतिक आदि पहलुओं के क्षेत्र में विकासमूलक कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया, जिसके क्रांतिकारी कदम का विरोध उस समय के अंग्रेजी हुकूमत के हुक्मरानों ने किया।

क्योंकि जहाँ महासभा सामाजिक लड़ाई उस समय की व्यवस्था से लड़ रही थी, जो अंग्रेजी हुकूमत के हिमायती थे, वहीं देश के आजादी की लड़ाई के लिये कार्यकर्ताओं को भी प्रशिक्षित कर रही थी।

परिणाम यह निकला कि महासभा के पदाधिकारियों को खुनी लड़ाई भी लड़नी पड़ी। जेल के शिकंजो में बंद होना पड़ा। जाने गंवाने पड़ी एवम् घर द्वार छोड़कर अपने देश में ही शरणार्थी होना पड़ा।

लेकिन महासभा के पदाधिकारियों, समर्थकों एवं सदस्यों ने अपने अभियान को जारी रखा।

आज 2020 में अखिल भारतवर्षीय चंद्रवंशी क्षत्रिय महाशभा का 114 साल हो गया।

अखिल भारतवर्षीय चंद्रवंशी क्षत्रिय महाशभा की सभी शाखाओं का विस्तार ग्राम सभा, पंचायत सभा, थाना सभा, जिला सभा, प्रदेश सभा स्तर पर करने का काम की गति 1940 से 1964 के दशक तक विराम लग गया।

ये वो दौर था जब देश आज़ाद हुआ। जिस वजह से चंद्रवंशी समाज दूसरे समाज से पीछे होती गई। लेकिन 1964 से 1970 के दशक तक स्व० टी० एन० दास, कोकिल प्रसाद सिंह एवं स्व० शिवदास सिंह के नेतृत्व में समस्त भारतीय विचारधाराओं को एक साथ जोड़कर महासभा का कार्य को आगे बढ़ाया गया।

8 मार्च 1994 को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में चंद्रवंशी समाज की विराट रैली का आयोजन किया गया जिस से पटना की सड़के भर गई।

  • गाँव-गाँव में शिक्षा के प्रति जागरूक किया गया।
  • एकता कायम करने को कहा गया।
  • राजनीती में प्रवेश होना की बात हुईँ।

सर्वप्रथम तिलक दहेज जैसी दानवी शक्ति से निपटने के लिए वर्ष 1998 में “चंद्रवंशी सामूहिक विवाह” का आयोजन बोधगया की पावन धरती के कालचक्र मैदान में चंद्रवंशी समाज ने प्रारंभ किया जिसमें आशातीत सफलता मिली और भारतीय समाज के हर वर्ग द्वारा साथ मिला ।

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History of Kulbhushan Nathuni Babu Singh

Today I am going to tell you the history of Kulbhushan Nathuni Babu Singh. I make video on national social issues and you can watch it by clicking this link.

The creator of the All India Chandravanshi Kshatriya Mahasabha was Kulbhushan Babu Nathuni Singh ji. Amar Surveer warrior Kshatriya Kulbhushan Babu Nathuni Singh ji of Purukul was born on Sunday 13 September 1856 and is an important and glorious day for every moon dynasty.

All Indians have been involved in the construction of India, but after the creation of the world and the varna system based on the field of karma, the Kshatriya society has played an important role in making India proud.

In Kshatriya society, the Kshatriyas of two dynasties have made the best of India with their sacrifice, sacrifice and sacrifice, which is not hidden from anyone. Today, pick up any historical book of the world and see it. You will get a description of it.

India is also named after Chandravanshi Kshatriya king Bharata and to know King Bharat, you will have to read or watch Mahabharata if you do not know.

In this dynasty, such personalities were born who changed the direction of history of the whole world with their might. In the Graths of India, we have done the work of writing and getting our own history.

The mighty, justice, donor and Tyagi King Nahusha of the Chandra Dynasty society had also taken care of the throne of Lord Indra as well. King Nahusha was married to Ashok Sundari, daughter of Mother Parvati and Mahadev Shankar, which you will find in the Indian text.

In the Dwapar Yuga, in order to save society and family from arrogance, he fought a ‘great crusade’ in the guise of “Kurukshetra” against the great and mighty warriors of his own family who are known all over the world as “Mahabharata”.

In this great war, Lord Vishnu had to fulfill his role as ‘Krishna’ by taking incarnation in the Chandravanshi Kshatriya dynasty itself. Lord Krishna was the son of Chandravanshi, but the descendants who came after him were called Yaduvanshi.

That is, Yaduvanshi was established from the Chandravanshi society.

If we study the great texts, Vedas and Puranas, then the importance of the “Chandravanshi Kshatriya” dynasty can be easily understood, but there is always change in the world.

At the same time, the speed of the rise of Chandravanshi Kshatriya dynasty stopped and the pace of decline started. Maharaja Jarasandha who was the king of a huge Magadha empire and Chandravansh became the last Chakravarti emperor of the Kshatriya dynasty.

After this there was a change of power and the society moved towards collapse. But time period reversed and in this dynasty, such great personalities were born who in 1868, during the time of slavery of India, sat in one place and got out of the slavery of the country. His name was Kulbhushan Nathuni Babu Singh.

On the one hand, the freedom struggle of the country should be fought with the British and on the other hand, by taking unity in social areas, taking revolutionary steps in the direction of bringing the honor and prestige of the former to the Chandravanshi Kshatriya family.

Kulbhushan Nathuni Babu Singh Biodata

In this sequence, Late Nathuni Prasad Singh Ji emerged. Born on 13 September 1856 in Marufganj, Patna City, Babu Nathunji was brought up in a very happy environment. His father Babu Shyamlal Singh Ji was a well-known agent and order supplier of that era. As the child grew up from simplicity and practice as Nathunji grew up and later he did many important works for the upliftment of the exploited, Dalits besides the Chandravanshi society.

When Kulbhushan Babu Nathuni Singh ji was 50 -51 years old, in the process of searching for his hidden people during this period of social service, in 1906 he established a national platform, which was named “All India Chandravanshi Kshatriya Mahasabha”.

Its executive represented people from Bengal to Lahore.

In 1912, he met the head of the Census Department of India and gave information about the history of the lunar dynasties and got the Mahasabha registered under the India Company Act 1882 under the name “All India Year Chandravanshi Kshatriya Mahasabha”.

  • Birth date of Kulbhushan Nathuni Babu Singh – 13 September 1856 A.D.
  • Father of Kulbhushan Nathuni Babu Singh – Babu Shyamlal Singh
  • Foundation Date of All India Year Chandravanshi Kshatriya Mahashabha – 1906
  • Founder of All India Year Chandravanshi Kshatriya Mahasabha – Kulbhushan Nathuni Babu Singh
  • Birthplace of the birth of Kulbhushan Nathuni Babu Singh – Marufganj of Patna City

All India Chandravanshi Kshatriya Mahasabha

After the establishment of the All India Chandravanshi Kshatriya Mahasabha, a development program was started in the area of ​​social, economic, educational, religious, cultural etc. aspects of the Chandravanshi Kshatriya family, whose revolutionary move was opposed by the ruling British rulers of that time.

Because while the Mahasabha was fighting the social war, which was the champion of the British rule, the workers were also training for the freedom struggle of the country.

The result was that the office bearers of the Mahasabha also had to fight an open battle. The prison had to be closed down. Had to lose and had to leave home and become a refugee in our country.

But the officials, supporters and members of the General Assembly continued their campaign.

Today, in 2020, it is 114 years of the All India Year Chandravanshi Kshatriya Mahasabha.

The pace of expansion of all the branches of the All India Year Chandravanshi Kshatriya Mahasabha at the level of Gram Sabha, Panchayat Sabha, Thana Sabha, Zilla Sabha, Pradesh Sabha was stopped from 1940 to 1964.

This was the period when the country became independent. Because of which the Chandravanshi society was lagging behind other societies. But from 1964 to the 1970s, the work of the General Assembly was carried forward by joining together all the Indian ideologies under the leadership of late T. N. Das, Kokil Prasad Singh and late Shivdas Singh.

On March 8, 1994, a grand rally of Chandravanshi Samaj was organized at the historic Gandhi Maidan in Patna, which filled the streets of Patna.

He was made aware about education in every village.

They were asked to establish unity.

There was talk of entering politics.

In order to deal with the supernatural power like Tilak dowry, first in the year 1998, “Chandravanshi mass marriage” was organized by the Chandravanshi Samaj at the Kalachakra Maidan in the holy earth of Bodh Gaya in which there was unprecedented success and was joined by every section of Indian society.

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